कविता
कविता, क्या है अर्थ इसका,
मालूम नहीं है ये मुझको,
बस लिख डालता हूँ मैं,
याद आ जाता है जो मुझको...
विचार समां जाते है मेरे,
शब्दों के इस जाल में,
और भाव्नैएँ भर देती हैं जीवन,
निर्जीव , निरर्थक से संवादों में...
सरिता जैसी बहती हुई धीरे धीरे,
उमंगें ले जाती है साथ अपने,
उचालती है लहरों की तरह मेरी पंक्तियाँ ,
और छोड़ जाती है पीछे कुछ सपने...
रह जाती है बीती हुई यादें ,
पद चिन्ह बनकर रेतीले किनारों में,
जुड़ जाते हैं उसमे विचार मेरे,
और बस जाती मेरी साँसों में...
अंखियों के झरोखे से नजर आने लगता है,
तब मकसद कुछ लिखने का मेरे भी दिल को,
और फिर बस लिख डालता हूं मैं,
याद आ जाता है जो भी मुजको .......
कविता क्या है अर्थ इसका...
मालूम नहीं है ये मुजको...
Monday, August 17, 2009
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